Best Stories For Kids In Hindi – कोयले में हीरा – Story in Hindi

कोयले में हीरा

पश्चिम बंगाल के रानीगंज में एक बहुत पुरानी कोयले की खान थी. जहां हर साल हजारों टन कोयला निकलता था मंगरू और उसका बेटा कोयला खान में मजदूर के रूप में काम करते थे. खान का ठेकेदार था राहुल चौधरी. मजदूर लाइन में खड़े हैं और ठेकेदार उन्हें मजदूरी बांट रहा है.( Best Stories For Kids In Hindi – कोयले में हीरा )

ठीकेदार -जल्दी जल्दी चलकर आओ इतने मर मरकर क्यों चल रहे हो.

मजदूर -मालिक कल मैंने ओवरटाइम किया था उसके पैसे भी दे दीजिए.

 ठीकेदार -काहे को ओवरटाइम उस दिन तुम काम पर लेट आए थे तो मैंने तुम्हारे पैसे काटे क्या.

मजदूर -मालिक उस दिन मेरी पत्नी की तबियत खराब थी.

 ठीकेदार – बहाना मत करो.ओवर टाइम का ध्यान रहता है और ले जाने का ध्यान नहीं रहता.आज के पैसे पकड़ो और जाओ यहां से.

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मंगरू का बेटा दीप अक्सर उससे पूछा करता पिताजी हमारी गरीबी कब दूर हो पाएगी. हम शहर जाकर घर कब ले पाएंगे. मंगरू उसे समझाता हुआ कहता हैं बेटा बस कुछ साल और दो चार साल में हमारे पास काफी रुपए जमा हो जाएंगे और हम कोयला खान में काम छोड़कर शहर जाकर कोई अच्छा धंधा कर पाएंगे.

फिर एकदिन ठीकादार ने कहा तुममें से जो भी एक साल तक अपनी मज़दूरी नहीं मांगेगा उसकी मजदूरी मेरे पास जमा होती रहेगी और एक साल बाद मैं उसे 20 प्रतिशत ब्याज लगाकर मज़दूरी दूंगा. इसमें तुम्हारा फायदा है.

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मंगरू और उसके बेटे ने एक साल लगातार मजदूरी नहीं ली और अपने पैसे ठेकेदार के पास ही जमा रहने दिए ताकि 20 प्रतिशत ब्याज के साथ उन्हें एक साल बाद ज्यादा पैसे मिल सकें.

लेकिन एक साल बाद चौकीदार की मन में खोट आ गई. एक साल बाद जब मंगरू ने पैसे मांगे तो ठेकेदार बहाने करने लगा. और ठीकादार ने कहा  मैंने जिस स्कीम में तुम्हारा पैसा इन्वेस्ट किया था वो स्कीम डूब गई. मैं कोशिश कर रहा हूं कि किसी तरह आधे पैसे ही निकल आए.

ठेकेदार ने कुछ दिनों बाद मजदूरों को उनके आधे पैसे दिए और आधे पैसे खुद मार लिए.

फिर दीप उसके पिता को कहता हैं पिताजी ठेकेदार ने हमारे साथ चालाकी की है. उसने आधे रुपए खुद खा लिए. हम मजदूरों को हड़ताल करनी चाहिए. ये सुनकर मंगुरु कहा बेटा अगर हड़ताल करेंगे तो वो हमें निकालदेगा.

 और हमारी जगह नए मजदूर रख लेगा. तुम चिंता मत करो सबकी करनी अपने साथ है. अगर राहुल ने हमारे साथ बेईमानी की है तो उसे कभी न कभी अपनी करनी का फल जरूर भुगतना पड़ेगा.

एक दिन जब मंगरू भाले से एक चट्टान तोड़ रहा था तो उसे चट्टान में कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया. मंगरू ने जब चट्टान थोड़ी और तोड़ी तो उससे सेब के बराबर एक हीरा निकला. ठेकेदार राहुल उस दिन खान पर नहीं आया था.मंगलू हीरा लेकर अपने घर गया और उसने बह हीरा एक सुनार को दिखाया.

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सुनार ने कहा इस हीरे की कीमत करोड़ों में है मैं तुम्हें इसकी कीमत नहीं दे सकता. तुम्हें इसे शहर ले जाकर बेचना होगा.

इससे पहले कि मंगरू हीरा शहर ले जा पाता सोनरनि सारी बात जाकर ठेकेदार राहुल को बतादिया. राहुल तुरंत मंगरू के घर पहुंचा और उसने मंगरू से हीरा छीन लिया.

मंगरू का बेटा ठेकेदार से बोला ठेकेदार जी ये हीरा पिता जी को मिला है इसका 50 प्रतिशत हिस्सा उन्हें ही मिलना चाहिए.

ठेकेदार ने कहा 50 प्रतिशत छोड़ो मैं तुम्हें एक फूटी कौड़ी नहीं देने वाला. तुम सिर्फ मजदूर हो और मैं तुम्हें मजदूरी देता हूं इससे ज्यादा तुम्हारा कोई अधिकार नहीं है. ठेकेदार हीरा लेकर चला गया.

दीप  ने कहा पिताजी ठेकेदार ने एक बार फिर हमारे साथ नाइंसाफी की है. मंगुरु ने कहा बेटा मैंने उस हीरे का एक छोटा सा टुकड़ा अपने पास रख लिया था ये देखो भले ही ये टुकड़ा करोड़ों में न बिके लेकिन इससे कुछ लाख रुपए तो मिल ही जाएंगे.

मंगरू ने हीरे का छोटा सा टुकड़ा शहर ले जाकर बेच दिया और शहर में एक मकान खरीद कर कपड़ों की एक दुकान खोल ली.

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वह अपने परिवार के साथ सुख से रहने लगा उधर ठेकेदार राहुल अपने लालची स्वभाव के कारण और ज्यादा हीरे पाने के लिए पागल होने लगा.

उसने एक दिन सारे मजदूरों को छुट्टी पर भेज दिया और अकेले खान में जाकर खुदाई करने लगा. और सोचने लगा अगर मंगरू को यहां एक हीरा मिला है तो मुझे जरूर और भी हीरे मिलेंगे. 

खुदाई करते करते ठेकेदार को ध्यान ही नहीं रहा कि वह मीथेन गैस के इलाके में आ गया है. जब वह थक गया तो बीड़ी पीने के लिए उसने माचिस जलाई. माचिस के चलते ही मीथेन गैस का भयानक विस्फोट हुआ और ठेकेदार उसी में मारा गया.

कहानी २ – सोने का महल

भानू सिंह का परिवार गोरखपुर गांव में रहता था, भानु एक गरीब मजदूर था. कभी कभी उसे काम नहीं मिलता था इसलिए घर का खर्चा चलाने के लिए उसकी पत्नी गीता को भी बड़े घरों में काम करने जाना पड़ता था.

गरीबी के कारण उनके घर अक्सर लड़ाई होती रहती थी. गीता भानु से कही चंदू की पैंट फट गई है, उसके लिए एक नई पैंट लादों. फिर भानु ने कहा ये रोजाना ग्रीन बल्ला खेलने जाता है तभी नीचे से अपनी पैंट फाड़ लाता है. अभी परसों ही मैंने उसकी पैंट पूर्ण ली थी. 

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ये पैंट छोटी हो गयी इसीलिए उसे आती नहीं.  फिर भानु ने कहा एक तो समय का काम नहीं है, शिवानी की शादी करनी है और तुम्हें नए कपड़े खरीदने की पड़ी है. ऐसे ो दोनों हर रोज़ कुछ न कुछ झगड़ते रहते हैं. 

भानु सिंह के घर में एक बहुत पुराणी अलमीरा थी. गीता जब भी सफाई करने के लिए उस अलमारी को हटाने की कोशिश करती तो भानु उसे रोक देता.

और कहता हैं ये अलमारी मेरे पूर्वजों की एकमात्र निशानी है. इसे भगवान के लिए जैसी रखी है वैसी ही रखी रहने दो. इसकी सफाई मैं कर दूंगा. 

एक दिन जब भानू घर पर नहीं था तो गीता ने सोचा आज वो घर पर नहीं है. आज तो मैं इस अलमारी को हटाकर सफाई करके ही रहूंगी.

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गीता ने अपने बेटे की मदद से अलमारी हटा दी और दीवार की सफाई करने लगी. गीता ने देखा कि दीवार पर एक गोल काला निशान है फिर उसने सोचा औरे ये किस चीज का निशान है. 

गीता ने जैसे ही उस निशान पर अपनी उंगली रखी दीवार में एक दरवाजा खुल गया. दरवाजे के अंदर बिल्कुल अंधेरा था. कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. 

फिर हिरा का बीटा ने कहा मां पहले पिताजी को आ जाने दो तब हमें दरवाजे के अंदर जाएंगे. क्या पता इसमें कोई भूत प्रेत निकल आए. 

शाम को जब भानु घर लौटा तो गीता ने उसे दरवाजा दिखाया. फिर भानु ने कहा जरा मोमबत्ती लेकर आओ. फिर मोमबत्ती से जब रोशनी की गई तो उनलोगों ने देखा कि दरवाजे के लगभग दो मंजिल नीचे एक रास्ता है जो कहीं जा रहा है.

फिर भानु ने सोचा नीचे उतरने के लिए पहले हमें सीढ़ी बनानी होगी. भानु के परिवार ने दो मंजिल की एक लंबी सीढ़ी बनाई और फिर दरवाजे के नीचे उतरे.

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गुप्त दरवाजे का रास्ता उन्हें एक बहुत बड़ी अंडरग्राउंड जगह पर ले गया जहां तीन सोने के बंगले बने हुए थे.

फिर भानु ने कहा विश्वास नहीं होता कि जमीन के अंदर इतने बड़े तीन बंगले हो सकते हैं. इनकी चमक तो अद्भुत है. सोने जैसी चमक रही है.

भानु  के परिवार ने तीनों बंगलों के अंदर जाकर देखा. बंगलों के अंदर हर चीज सोने की थी. सोने के बर्तन सोने की चारपाई सोने का दरवाजा सोने का सोफा. 

फिर भानु ने कहा लगता है मेरे पूर्वज बहुत अमीर थे और उन्होंने ये तीन सोने के बंगले छुपाकर रखे थे. और गीता ने कही अब हमें क्या करना चाहिए. क्या हम इन तीनों बंगलों को बेचदे और अमीर बन जाए.

भानु ने कहा नहीं ऐसा करना बेवकूफी होगी अगर हमने बाहर किसी को बताया कि हमारे पास तीन सोने के बंगले हैं तो गांव के बड़े बड़े जमींदार हमसे किसी तरहा ये बंगले छीन लेंगे. बाहर से हमें ऐसे ही गरीब बने रहना होगा.

इन बंगलों का सोना हम धीरे धीरे इस्तेमाल करेंगे शिवानी बिटिया को नानी के घर से बुला लो. उसकी शादी का इंतजाम हो गया है और तुम काम पर जाना बंद कर दो सिर्फ मैं काम पर जाता रहूंगा ताकि गांव में किसी को शक न हो.

सोने के बदले मिलने से भानु की गरीबी दूर हो गई भानु कोई दिखाबा नहीं करता था और दूर के गांव जाकर हर महीने थोड़ा थोड़ा सोना बेच आया करता था.

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सिबानी अपने पापा से कही पापा मेरी शादी पूरे धूमधाम से होनी चाहिए. इतनी शानदार शादी करो कि पूरा गांव देखता रह जाए. यह सुनकर भानु ने कहा बेटी अगर हमने ज्यादा खर्च किया तो गांव के लोगों को शक हो सकता है और हम मुसीबत में फंस सकते हैं.

सिबानी जिद में टेल हुए थे और कही मुझे कुछ नहीं पता. कोई मुसीबत भी आएगी. क्या आप तीनों बंगले चंदू के लिए छोड़ देंगे? मेरी शादी एक ही बार होनी है तो फिर उसने कंजूसी क्यों.

भानु की बेटी जिद पर आड़ गई इसलिए भानू को उसकी शादी खूब धूमधाम से करनी पड़ी.

इतनी शानदार शादी को देखकर गांव के लोग आश्चर्य चकित रह गए. गांव में इस बात की चर्चा होने लगी कि आखिर एक मजदूर इतनी अच्छी शादी कैसे कर सकता है. 

और एकदिन गाओ वाले भानु से पूछा अरे भाई भानू तुमने अपनी बेटी की इतनी बढ़िया शादी कैसे कर दी हमें तो बड़ा आश्चर्य हो रहा है. फिर भानु ने जबाब दिया पंडित जी मैं 10 साल का था तबसे मजदूरी कर रहा हूं. मैंने एक एक पैसा अपनी बेटी की शादी के लिए जोड़कर रखा था. मैंने मकान नहीं बनवाया और सारा पैसा अपनी बेटी की शादी में खर्च किया.

अच्छा तो ये बात है लेकिन तुमने बहुत अच्छा काम किया. हमने ऐसा खाना कभी नहीं खाया था. 

गांव में मोटू पतलू नाम के दो चोर रहते थे उन्होंने अक्सर भालू को शहर जाते देखा था. 

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फिर मोटू भाई ने पतलू से कहा, पतलू भाई कोई न कोई गड़बड़ तो जरूर है. एक तो ये भानू हर महीने शहर जाता है और फिर इतनी महंगी शादी इसके घर पर फ्रीज कूलर टीवी सारे आइटम हैं. मजदूरी में इतनी कमाई कैसे हो सकती है. 

फिर पतलू ने कहा ठीक कहा भाई  हमें इसके घर की तलाशी लेनी चाहिए. 

एक दिन जब भानू घर पर नहीं था तो मोटू पतलू कपड़े बेचने वाले बनकर भानु के घर में घुस गए. उन्होंने नशीले रुमाल से गीता और चंदू को बेहोश कर दिया. पूरे घर की तलाशी लेने पर उन्हें गुप्त दरवाजा मिल गया. 

फिर मोटू ने कहा लगता हैं इस दरवाजे में ढेर सारी दौलत रखी हुई है. मोटू पतलू ने बिना देखे अंधेरे में ऐसे ही पैर बढ़ा लिया और वे दोनों दो मंजिल से नीचे जा गिरे. 

शाम को जब भानू घर लौटा तो उसने देखा कि गीता और चंदू बेहोश पड़े हैं. भानु ने पानी के छींटे मारकर उन दोनों को उठाया.

फिर वह गुप्त दरवाजे के अंदर गया तो उसने देखा कि दो चोर नीचे बेहोश पड़े हुए हैं.

चोरों को जब होश आया तो वे एक खंबे से बंधे हुए थे और भानु का परिवार उनके सामने था.

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फिर भानु ने कहा हम लोग रोजाना सीढ़ी हटाकर रख लिया करते थे क्योंकि हम जानते थे कि कभी न कभी कोई चोर आ सकता है. तुमने बिना देखे ही पैर बढ़ा लिया और दो मंजिल से सीधे नीचे गिर पड़े.

मोटू और पतलू  कहा हम कौन हैं? हम कहां हैं ?

फिर गीता ने कहा लगता है सिर पर चोट लगने के कारण इन दोनों की याददाश्त चली गई है. चलो अच्छा हुआ बरना इन दोनों का कोई और इन्तजाम करना पड़ता. 

भानू दोनों चोरों को हजारों किलोमीटर दूर जाकर शहर के एक अस्पताल में भर्ती करके घर वापस लौट आता हैं .
और खुसी खुसी अपना जीबों बिताना लगता हैं. 

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Dhruba Mandal
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम हैं ध्रुब मंडल में ओड़िसा के एक छोटे से गाँव में से हूँ और इस ब्लॉग संस्थापक हूँ. में एक ग्रेजुएट स्टूडेंट हूँ. और मुझे टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, लाइफ स्टाइल के बारे में लिखना ज्यादा पसन्द आता हैं.
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