Hindi Stories With Moral For Class 8 – अच्छाई और इंसानीयत

अच्छाई और इंसानीयत

एक जमाने में अनंतपुर गांव में सोमनाथ नामक किसान रहता था । उसके तीन भाई थे वो सब अपनी मां के साथ एक ही घर में जिंदगी बसर किया करते थे । वो एक मामूली साधारण घराने से ताल्लुक रखते थे । एक ही परिवार की तरह रहते थे उन तीनों भाईयों में दो भाई ।(Hindi Stories With Moral For Class 8 – अच्छाई और इंसानीयत)

एक रोज की मजदूरी करते थे दूसरा और एक भाई राजा के दीवान में सिपाही की नौकरी करता था । सोमनाथ उसकी आधी एकड़ जमीन देख लिया करता था ।

उसकी मां को हर वक्त कोई न कोई बीमारी रहा करती थी । सोनल की शादी चार साल पहले ही सुरभि से हो चुकी थी । एक लड़का भी है । सुरभि भी बहुत अच्छे सीधी सादी थी सोमवार को हर वक़्त अपने भाइयों की फिक्र लगी रहती थी ।

सोमनाथ जमीन केड का काम खत्म करके खुद अपना पेशा हजामत करके कुछ पैसे कमा लिया करता था । तीनों भाई अमरनाथ रामनाथ और भोले नाथ ये तीनों अपनी अपनी सारी कमाई लेकर घर के बड़े भाई सोमनाथ के हाथों में डाल देते । तीनों भाई हीरे जैसे थे ।

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Hindi Stories With Moral For Class 8

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एक दिन अपने तीनों भाइयों को अपने पास बिठाकर सोमनाथ कहा कि मेरे तीनों भाई मेहनत करके कमा रहे हैं । यह देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है । पिताजी का ना होने की वजह से घर की जिम्मेदारी मैंने ही स्वीकार किया । सदियों से अपना खानदान अच्छा नाम और शोहरत पा चुका है ।

अब हम भी उसी मार्ग में चलेंगे । मैया तुम जो कह रहे हो वो बिल्कुल सच हैं लेकिन सच्चाई इंसानियत के नामपर चलें तो कुछ नहीं बचेगा । हद से ज्यादा चाय भी शायद ठीक नहीं ।

मुझे भी यही सच लगवायें बयान हैं फिर सोमनाथ ने कहा गलत बेटा अच्छाई और इंसानियत की हर वक्त जीत हुई बुराई से युवतियां कामयाबी मिलती हैं ये बात याद रखना ।

सोमनाथ की बातें दोनों छोटे भाई रामनाथ और भोले नाथ के कानों में नहीं उतरे । सोमनाथ की बातों का कोई असर नहीं हुआ दोनों छोटे भाइयों को पर बड़े भाई को कुछ नहीं कह सके मजबूरन ठीक है कह दिया । घर में रामनाथ और बोले नाथ तौर तरीका कुछ अजीब सा होता जा रहा था ।

फिर एक दिन दोनो भाई-अच्छाई इंसानियत के नाम पर चले तो आखिर में हमें छिपे के सिवा कुछ मिलने वाला नहीं । अगर हम अपने भाई की बात सुने तो हम क्या आगे बढ़ेंगे? मुझे तो ये सब देखकर बहुत चिड़चिड़ाहट हो रही है सदियों से यही कष्ट कोई भी अपने वंश में ठीक से किसी ने भी नहीं कमाया ।

फिर एक भाई ने कहा हां तुमने सच कहा छोटे भाई मुझे भी खूब पैसे कमाकर अच्छी सी लड़की देखकर शादी करनी है.

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फिर छोटे भाई ने कहा हाँ मेरा भी ख्याल यही है इस तरह इधर उधर की चीज़े बेच के जिंदगी गुजारना मुझे नहीं हो रहा हैं । हमें पैसा कमाने के लिए क्या करना होगा मेरे भाई?

ये कहकर दोनों अपने अपने ख्यालात को अपने दिल में राखलिये । और फिर सोचते पहले हम भाई के पास से अलग हो जाते हैं । और छोटे भाई ने कहा मैं एक मालिक को जानता हूं उससे मिलने पर हमें गुप्त धन का पता शायद मिल जाएगा ।

फिर छोटा भाई ने कहा बाप रे अगर इस विषय को भाई से कहे तो समझो क्या होगा । फिर दूसरा भाई ने कहा तुम घबराना मत में बड़े भाई से बात करूंगा ।

दूसरे ही दिन सुबह नींद से जागे सोमनाथ को अपने दिल में छुपी बात को कैसे कहें सोच कर आगे पीछे हो रहे थे वो दोनों । भाइयों के अजीब अंदाज को देखकर सोमनाथ कहा कि देखो भाई लगता है तुम दोनों मुझसे कुछ कहना चाहते हैं । क्या बात है? बोलो अपने भाई से बात करने के लिए डर किसलिए बोलो ।

फिर सोमनाथ के भाई ने कहा भैया यहां हम इस छोटी मोटी जिन्दगी से तंग आ चुके हैं । मैं सिपाही की तरह और छोटा भाई रोज रोज की मजदुरी और तुम किसान की तरह । अब ऐसा कब तक चलेगा? कब तक भैया? फिर सोमनाथ ने कहा तुम्हारी सोच का कोई अर्थ नहीं ।

अगर सब पैदायशी से धनवान होते तो इस दुनिया में गरीब न होता तो कोई कष्ट नहीं होता । इंसान को अगर कष्ट न हो तो क्या बला कोई भगवान को याद करेगा ।

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जिसे जितना मिलना चाहिए लिखकर ही वो ऊपरवाला हमें जन्म देता है । वो जो लिखा वो जरूर हमें होके रहेगा । देखो राम नाथ तुम हम सब में छोटे हो तुम्हें अब भी पनपना है। और एक दूसरी बात तुम्हें पता है इस जगत में जो लोग अच्छाई और इंसानियत पर चलते हैं वही दौलत वाले होते हैं ।

सोमनाथ की बातें रामनाथ को चुभने लगी और कहा कि मैया तुम हम पर पाबंदी लगा रहे हो । हमें जरा छोड़कर देखो हम क्या हैं वो कर दिखाने का मौका मिलेगा हमें । छोटे भाइयों की जिद देखकर उसका दिल दुखी हुआ ।

अब किसी को पलटकर जवाब दिए बिना खामोश हो गया । तब उनकी मां गोविंद अम्मा पलंग पर से कराहते हुए उठकर कहने लगी देखो बेटा अगर बड़े भाई की बात सुनोगे तो तुम सुधरेंगे ।

अगर तुम अपने मन की कहने पर चलोगे तो तुम कभी भी अच्छे नहीं रहोगे । ये मां की बातें भी उनके कान में नहीं उतरी । तभी उनकी भाभी सुरभी बीच में आकर कहने लगी बेटे रामनाथ तुम्हारे भाई का कहना मानिये लगता है सब ठीक होगा । अब आगे तुम्हारी मर्जी ।

इस तरह घर के सभी रामनाथ और भोलेनाथ को बहुत समझाने पर भी वो लोग किसी की बात को समझने की स्थिति में नहीं हैं और दूसरे ही दिन किसी को बताए बिना ही घर से चले गए रामनाथ और भोलेनाथ ।

उनकी इस तरह चले जाने की वजह से सोमनाथ अपने भाईयों के बारे में परेशान था । जो है उसी में खुश रहने के बजाय सोमनाथ के बातों को ठुकराकर घर छोड़कर चले जाने वाले भाइयों के बारे में सोच सोच कर दुबला हो गया सोमनाथ ।

बचा हुआ दूसरा एक छोटा भाई हरनाथ ही उसकी देखभाल कर रहा था । उसके दो साल बाद बारिश न होने की वजह से खाक पड़ गया । सभी जनता अम्बिल पी पी कर दिनों को कठिन दौर से गुजर रहे थे ।

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एक वक्त खा लिया तो दूसरे वह भूखे रहने जैसा अकाल पड़ गया था । इस दुस्तिति को देख उस राज्य का राजा सारे राज्य में अम्बिल के केंद्रों का स्थापना कर की जनता के भूख प्यास का कुछ न कुछ इन्तजाम किया हे ।

सोमनाथ भगवान से प्राथना करते हुए कहा हैं भगवान इस बुक्कल आकाल से प्रजा की रक्षा करना बच्चे बूढ़े भूख से बिलबिला रहे हैं । बस अब इस आकाल को रोक दो भगवान । अगर बारिश होगी तो हम सबकी जिंदगी में खुशियां आएंगी ।

मेरे दोनों भाई घर छोड़कर दो साल गुजर गए । इस मुसीबत के समय वो लोग पता नहीं क्या कर रहे हैं कैसे हैं ये भी पता नहीं । मेरे भाई जहां भी हों उनकी रक्षा करना प्रभु । सोमनाथ के घर में भी खाने को एक दाना भी नहीं बचा था ।

अम्बिल लाकर सब थोड़ा थोड़ा पीकर अपनी जान बचा रहे थे । अब इस तरह की कठिन परिस्थिति में दूसरे देशों में रहने वाला सोमनाथ का जिगरी दोस्त उसके घर अचानक आया ।

मेरे दोस्त बहुत दिनों के बाद तू मुझे याद आये । कष्ट समय में ही न दोस्त याद होते हैं । इसीलिए अब मैं तुम्हारे पास आया हूं । दो दिनों से मैंने कुछ नहीं खाया कुछ भी करके मुझे थोड़ा खाना दो । इस तरह बहुत ही आ जी जी से मांगने वाले दोस्त की बात को इनकार किए बिना जो घर में छुपा कर रखा हुआ 4 सेर चावल से खाना पकाकर उसे खिलाया ।

भूखे रघुवीर घप घप खाकर तोड़ा ही बचाया । खूब खाकर डकार लेकर चला गया । जो बचा हुआ था वह सोमनाथ अपनी मां को खिलाने के लिए कह कर बाजार चला गया । सोमनाथ का मा सुरभि से- तुम्ही खालो बेटी मुझे भूख नहीं है ।

उसने नहीं खाई फिर सुरभि ने अपने देवर अमरनाथ को खिलाना चाहिए सोचकर उसका पास जाता हैं । अमरनाथ ने कहा ये खाना बच्चे को खिलाओ भाभी ।

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मुझे भूख नही हैं मां बाजार में मांगने वाली बुढ़िया को देख कर मेरे भूख मिट गई । यह खाना उस बुढ़िया को दे देंगे । ये बात बेटे से सुन कर उस भिखारिन को बुलाकर उस खाने को दे दिया सुरभी ने । उस दिन सबने पानी पीकर ही गुजार दिया । दूसरे दिन भी यही हालत थी ।

एक दिन सुबह से जोर की बारिश होने लगी । सारी प्रजा को बारिश को देखकर जबर्दस्त हिम्मत आ गई ।

नागर उठाकर जमीन नागर ने निकल पड़े सभी । सोमनाथ भी अपने नागर से अपने खेत को नागरने लगा । तब नगर से लगकर खजाने के साथ एक घड़े बाहर निकले । उस धन से सोमनाथ एक बहुत बड़ा धनवान बन गया ।

आज एशो आराम से सोमनाथ की जिंदगी ही बदल गई । एक दिन अचानक उस बड़े बंगले के सामने भीख मांगते हुए दो फकीर आए । उन्हें देख कर सोमनाथ ढेर हो गया । वो दोनों उसी के भाई हैं ।

अपने दोनों भाई रामनाथ और भोलेनाथ को क्षमा करके गले से लगा लिया सोमनाथ । फिर दोनों भाई अपने बड़े भाई से अपने गलती के लिए माफी मांगी फिर सब मिलकर खुसी खुसी जीने लगे ।

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Dhruba Mandal
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम हैं ध्रुब मंडल में ओड़िसा के एक छोटे से गाँव में से हूँ और इस ब्लॉग संस्थापक हूँ. में एक ग्रेजुएट स्टूडेंट हूँ. और मुझे टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, लाइफ स्टाइल के बारे में लिखना ज्यादा पसन्द आता हैं.
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