Bhutiya Kahani – भूखी चुड़ैल – The Hungry Witch

Bhutiya Kahani – भूखी चुड़ैल – The Hungry Witch

भागलपुर नामक एक गांव में हीरा अपनी बीबी चमेली व बेटे कालू के साथ रहता था । हीरा ही किसान था । वह अपने खेत में तरह तरह की सब्जियां उगाते था और उन सब्जियों को गांव व शहर के लोगों को ताजी सब्जियां बेचता था । सबको हीरा का ताजी सब्जियां बहुत पसंद आती । हीरा अपने काम को पूरी लगन व मेहनत से करता ।हीरा की खेती बाड़ी में उसका बेटा कालू भी उसकी मदद करवाता था । हीरा जब भी शहर में सब्जी बेचने जाता तो बीच रास्ते में बेहद घना जंगल पड़ता । जंगल के बीचो बीच एक बहुत बड़ा पीपल का पेड़ था । उस पेड़ पर चुड़ैल रहती थी । चुड़ैल दिखने में बहुत मोटी होती है । चुड़ैल को हर समय भूखी लगी रहती । एक दिन जब हीरा जंगल के रास्ते से जा रहा था तो उसे चुड़ैल देख लेती है । चुड़ैल हीरा के पास सब्जियों का ठेला देख बहुत खुश होती है ।(Bhutiya Kahani – भूखी चुड़ैल – The Hungry Witch)

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चुड़ैल-औरे बाह क्या बात हैं में इतना सारा खाना शैडो कुछ जाके ठेले से खाया जाए चुड़ैल ठेले से चुपचाप पांच ताजी ताजी सब्जियां उठा लेती हैं । और पेड़ पर बैठ कर खाने लगती हैं । और कहने लगा अरे वाह क्या बात है  आज  तो मजा आ गया । मैंने आज पेट भर कर खाना खाया । अब मैं अच्छे से आराम की नींद सो पाऊंगी । कुछ देर बाद जब हीरा अपने गांव पहुंच जाता है तभी एक आदमी हीरा से सब्जी लेने के लिए रुकता है ।

आदमी-अरे भैया बैंगन कैसे किलो ।

हीरा– भैया 40 रुपए की किलो लेलो भैया  ताजे बैंगन है । और उस ने देखा और कहा अरी ये क्या हुआ जब मैं शहर से निकला तो तब मेरे पास बहुत सारी सब्जियां थी ये कम कैसे हो गई गांव तक आते आते ।

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हीरा अपनी सब्जियां गांव में बेचते हैं और अपने घर की तरफ निकल जाते हैं । ऐसे ही हर रोज हीरा उसी रास्ते से जाता था जिस रास्ते में पीपल का पेड़ था । और उस पेड़ से चुड़ैल उसकी सब्जियां चुरा लेती । एक दिन हीरा अपना ठेला लेकर गांव की तरफ लौटी रहा होता है कि तभी चुड़ैल उसे देख लेती है ।

चुड़ैल-आरी ही आदमी रोज जंगल से गुजरता है । आकार में इसकी साथ इसके घर चली जाऊंगी तो मेरी लॉटरी लग जाएगी । मुझे दिन रात खाना मिलेगा मैं बिल्कुल भूखी नही रहूंगी ।

ये सोच चुड़ैल हीरा की रखे ठेले में एक टमाटर में तब्दील हो जाती है । हीरा अपना ठेला लेकर अपने घर पहुँचता है । हीरा इस बात से बिल्कुल अंजान होता है कि उसके ठेले में रखी हुई सब्जियों में चुड़ैल एक टमाटर का भेस बदलकर आ गई है । चुड़ैल हीरा का घर देख बहुत खुश होती है । हीरा के घर के बिल्कुल सामने उसका खेत होता है जिसमें हीरा ने तरह तरह की सब्जियां उगाई होती हैं ।

चुड़ैल-और क्या बात है  मेरी तो चांदी ही चांदी हो गई । यह तो सब्जियों के खेत है । मैं तो अब जो चाहा वह पेट भर कर खाऊँगी । चुड़ैल हीरा की घर जाकर टमाटर का भेष बदल कर चुड़ैल का ही रूप ले लेती है ।

चुड़ैल– औरे आब मुझे कहीं छुप जाना चाहिए अगर मुझे किसी ने देखा तो दिक्कत हो जाएगी ।

चुड़ैल हीरा की घर में छिपने की जगह ढूंढती रही होती है कि इतनी में हीरा का बेटा कालू चुड़ैल को नजर आ जाता है ।

चुड़ैल– औरे आ एक अच्छी तरकीबें मैं हीरा के बेटे के अंदर ही घुस जाती हूं और पेड मजे से सब्जियां खाऊंगी ।

चुड़ैल कालू के शरीर के अंदर घुस जाती है । सुबह उठते ही हीरा हमेशा की तरह सब्जी बेचने शहर की तरफ निकल पड़ता है । इतने में ही कालू नींद से जाग जाता है ।

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कालू के मा– औरे कालू बेटे तुम उठ गये तुम जल्दी से नाहलो में तुम्हारे लिए नास्ता लगा देती हूं ।

चुड़ैल– हा हा हा , आज तो बहुत मजा आएगा खूब खाने को मिलेगा ।

कालू नहाकर बाहर आता है । कालू की मां चमेली उसके लिए नाश्ता लगा देती है । देखते ही देखते कालू घर में बना सारा खाना खत्म कर देता है ।

कालू के मा– अरी आज इस कालू को क्या हुआ, ये तो बहुत कम खाने का था । बल्कि उसको  डॉट  के खाने खिलाने पड़ता था । इसे आज एकदम से क्या हुआ ।

चुड़ैल– क्या मजा आ रहा है । जंगल में तो खाने को कुछ मिलता ही नहीं था । यहा तो खूब जमकर सेवा हो रही है ।  कालू खूब पेट भरकर नाश्ता कर लेता हैं ।

कालू के मा– कालू चलो अब नाश्ता पानी हो गया है । एक बार खेत में जाकर फसलों में पानी दे आना ।

कालू– ठीक हैं  मां । कालू उसके मां की बात सुनता है और खेत में फसलों को पानी देने चला जाता है । खेत में कालू बहुत सारी सब्जियों को देख वह तुरंत चुड़ैल में तब्दील हो जाता है ।

चुड़ैल-अब वे जितनी चाहे उतनी सब्जीया खा सकती हूं । यहा मुझे कोई रोकने टोकने वाला नहीं हैं ।

चुडैल खुशी खुशी सब्जियों को खाने लगती है ।

चुड़ैल– आब बहुत सारी सब्जियां खा लि मैंने। साथी बहुत देर हो गई है । अगर चमेली खेत में आ गई और मुझे देख लिया तो बड़ी दिक्कत हो जाएगी मेरा पर्दाफाश हो जाएगा । मुझे अब जोल्दी फसल में पानी दे देना चाहिए ।

चुड़ैल तुरंत कालू के रूप में बदल कर फसलों में पानी देने लगती है । कालू फसलों में पानी देकर अपने घर की तरफ चला जाता है ।

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कालू– मां मैं फसलों में पानी दे आया ।

कालू के मा-थिक हैं बेटा ।

चुड़ैल– मुझे बहत ध्यान से रहना होगा इधर तभी मुझे मेरी मनचाही सब्जियां मिल पाएंगी ।

ऐसी ही चुड़ैल रोज कालू के भेस में खेत में जाती और अपनी मनचाही सब्जियां खाती । एक दिन हीरा चमेली और कालू खेत में जाते हैं । वहां कालू बेकाबू हो जाता है और खेत में लगी सब्जियां खाने लगता है । कालू को देख चमेली और हीरा बहुत हैरान होते हैं ।

हीरा-कुछ दिनों से देख रहा हूं । खेत में सब्जियां दिन पर दिन कम होती जा रही है ।

कालू के मा-सही कह रही हो जी ये कालू अब खाना भी बहुत ज्यादा खाने लगा है । कहीं यही तो नहीं खेत में आकर रोज हमारी फसले खाता है ।

हीरा-अरे पर इतनी सब्जियां उसके पेट में चली कैसे जाती है ।

कालू के मा-हम सही कह रहे ही जी कुछ तो गड़बड़ हैं ।

तभी कालू के अंदर की चुड़ैल देख लेती है कि उसे हीरा और चमेली देख रहे हैं । चुड़ैल सब्जियां खानी बंद कर वापस हीरा और चमेली के पास चला जाता है । फिर हीरा चमेली और कालू अपने घर की तरफ लौट जाते हैं ।

कालू के मा-अब मुझे इस कालू पर ध्यान रखना होगा कि सब्जियों का क्या कर रहे । इस पर कड़ी नजर रखनी पड़ेगी ।

अगले दिन सुबह उठकर कालू नहा धोकर तैयार होता है । कालू के अंदर की चुड़ैल चमेली को रसोई में देखकर अपने भेस में आ जाती है ।

चुड़ैल-मुझे बहुत जोर से भूख लगी है । मैं फ्रिज में जाकर देखती हूं खाने में क्या है । चुड़ैल फ्रिज में खाना ढूंढती रही होती है इतने में चमेली चुड़ैल को चुपके से देख लेती है । चुड़ैल तभी कालू के अंदर घुस जाती है । चमेली चुड़ैल को देख बहुत हैरान हो जाती है । शाम को हीरा शहर से सब्जी बेचकर घर आता है । तभी चमेली उसे सारी बात बता देती है ।

हीरा – अच्छा अगर ऐसा है तो मुझे अपने बेटे का इलाज करवाना पड़ेगा जल्दी से जल्दी ।

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कालू का मा-हा जी हां जी अब बिलकुल सही कह रहे जी ।

अगले दिन हीरा और चमेली अपनी बेटा कालू को लेकर गांव के पंडित जी के पास जाते हैं । पंडित जी मंदिर में बैठे हुए अपनी मंत्र जाप कर रहे होते हैं । मंत्र जाप करने के बाद हीरा अपने बेटे कालू को पंडित जी को दिखाता है ।

हीरा– देखिये गुरूजी हमारे बेटे को कुछ हो गया है । इस पर एक भयानक चुड़ैल का साया है । ये सब मेरी बीवी बीवी चमेली ने खुद अपनी आंखों से देखा हैं।

पंडित-ओम नमः शिवाय बेटा मेरे पास आकर बैठो ।

कालू पंडित जी के पास जाकर बैठ जाता है पंडित जी कालू पर गंगाजल छिड़कते हैं और एक ताबीज कालू को पहनाने लगते हैं । जैसे ही पंडित कालू को ताबीज पहनाने लगते हैं तभी कालू के अंदर से वो मोटी चुड़ैल बाहर निकल जाती है । और बहुत जोर जोर से रोने लगती है ।

चुड़ैल– मुझे मत मारो में बहुत भूखी हूँ ।

पंडित– तू इस बच्चे में क्या करने आई है इसको जीने क्यों नहीं दे रही ।

चुड़ैल-एक दिन के पीता हीरा जंगल के रास्ते अपनी रेहड़ी लेकर के जा रहे थे । में बहुत भूखी थी मैंने हीरा की जोड़ी से सब्जियों खाई । और एकदिन उसके ड्योढ़ी में टमाटर का रूप लेकर आ गई । हीरा के घर में घुसकर मैं उसके बेटे कालू के अंदर घुस गयी और तभी से मैं इसके अंदर रहती हूं ।

पंडित-अब तुम्हें मैं मुक्ति दे रहा हूं । तुम्हारी कोई आखिरी इच्छा है ?

चुड़ैल– हां मुझे भूख लगी हैं ।

पंडित चुड़ैल को भरपूर खाना खिलता है और कालू को ताबीज पहनता हैं, और चुड़ैल को मुक्ति दिलाता है ।

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