10 Best Jadui Kahani Hindi – जादुई कहानी हिंदी में

Best Jadui Kahani Hindi For Kids

इस लेख में, हम आपको हिंदी में जादुई कहानियों(Jadui Kahani) बताने जा रहे हैं, एक बच्चे के रूप में, आपने अपने दादा दादी से इन कहानियों को सुना होगा। ये कहानियाँ बहुत जानकारीपूर्ण और शिक्षाप्रद हैं। आप इन जादुई कहानियों से कई अच्छी चीजें सीखेंगे। जिसका उपयोग आप अपने जीवन में सफलता पाने के लिए कर सकते हैं।

ये कहानियाँ बहुत ही रोचक हैं। जिसे पढ़कर आपको काफी मजा आएगा। इनमें हिंदी 2021 में कुछ नई जादुई लघु कथाएँ (Jadui Kahani) दी गई हैं। ताकि आप नया महसूस करें।

यहां हम आपको बच्चों के लिए बंगाली में शीर्ष 10 जादुई कहानियां दे रहे हैं।

Jadui Kahani Hindi
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 1. Jadui Kahani Hindi – मिट्टी का जादुई घड़ा 

Jadui Kahani Hindi
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बहुत पुरानी बात है। एक गांव में गरीब आदमी अपनी बीवी के साथ रहता था। उस आदमी का नाम रामू था। वो इतना गरीब था कि दो वक्त की रोटी भी नहीं मिलती थी। हर रोज रामू सवेरे उठकर जंगल में जाता। वो सूखी लकड़ियां जमा करता। पास के गांव में बेच देता और अपने परिवार का पेट पालता। 

रामू बहुत सीधा सादा और भोला था मगर उसकी पत्नी बहुत ही लालची और स्वार्थी थी। वो हमेशा रामू को गरीबी की वजह से ताने देती थी। कड़वी बात कहती थी और हमेशा मायके का उदाहरण देती थी। रामू इन सब बातों से बहुत दुखी होता था लेकिन उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। 

उसने सोचा कि जब तक पर्याप्त पैसे नहीं कमाता घर वापस नहीं आएगा। दूसरे दिन रामू सवेरे जल्दी ही जंगल की ओर चला गया।

चलते चलते रामू थक गया। उसने पास के एक पेड़ के नीचे सहारा लिया और वहां बैठ कर सोचने लगा। उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है। बड़ी उदासी में वो पेड़ के नीचे बैठ कर सोचने लगा हे। 

है भगवान। क्या करूं?  मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा। अपनी पत्नी का पेट कैसे पालू मैं तो अपनी पत्नी का ढंग से पेट भी नहीं पाल सकता। कैसा पति हूँ ? रामू खुद को कोसने लगा। 

तभी एक साधू वहां से गुजरा। उसने रामू को देखा और उसके पास आकर पूछा, हे मानव तुम यहां क्यों बैठी हूं?

फिर  कहा हे महात्मा मैं बहुत ही गरीब हूं। मैं इतना गरीबी को अपनी पत्नी का भी पेट नहीं पाल सकता।

अरे अरे अरे  साधु बोली। फिर रामु ने कहा मैं तब तक यहां से नहीं जाऊंगा जब तक पर्याप्त भोजन नहीं जुटा लेता। 

उस साधु को रामू पर दया आ गई। उन्होंने उसे डिब्बा दिया और कहा ये एक मिट्टी का जादुई घड़ा है। इसमें तुम्हें रोज एक सिक्का मिलेगा। इसके लिए तुम्हें उस घड़े को तीन बार हिलाना होगा। लेकिन इस घड़े को कभी खोलने की कोशिश मत करना वरना ये काम नहीं करेगा। 

रामू ये सुनकर खुश हुआ। उसने साधु को धन्यवाद बोलकर खुशी खुशी जाने की तैयारी की। घर आते ही उसने सारी हकीकत अपनी बीवी से बयां की। उसकी पत्नी बहुत खुश हो गई। उन्होंने तुरंत ही उस घड़े को तीन बार हिलाया और सच में घड़े से एक सिक्का निकला। 

रामू यह सिक्का लेकर दुकान खाने का कुछ प्रबंध करने गया और दोनों पति पत्नी आराम से खा पीकर सो गए। उसकी जिंदगी ऐसे ही कुछ दिनों तक चलती रही। रामू रोज घड़े को हिलाता सिक्का लेता और बाजार से खाने का सामान ले आता। 

एक दिन रामू हर दिन की तरह सवेरे काम को चला गया और इधर उसकी पत्नी को लालच सवार हुई।उसने सोचा क्या रोज रोज एक सिक्का निकालेंगे। ऐसा करती हूं। सबसे सिक्के एक बार निकाल लेती हूं। रोज के झंझट से छुटकारा। 

रामू की पत्नी ने जोर से मटके को जमीन पर फोड़ा। घड़ा पूरी तरह टूट गया। 

हे भगवान ये क्या। ये घड़ा तो पूरी तरह खाली है। इसमें तो कुछ भी नहीं। ऐसा कहते ही वो रोने लगी। अपनी लालच की वजह से उसने सब कुछ खो दिया।

रामू जब वापस आया तो उसने खड़ा टूटा हुआ पाया रामू फिर अपने नसीब को कोसने लगा। पत्नी की लालच की वजह से रामू को फिर से गरीबी सहना पड़ी। 

कहानी से सीख- Jadui Kahani Hindi

लालच करना बुरा है जो मिला उसी में खुश रहना है।

2. Jadui Kahani Hindi – जादुई घडी 

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बहुत दिनों पुरानी बात है। एक गांव में सीता नाम की बहुत गरीब औरत रहती थी उसके पास सिर्फ एक गधा था जिससे मजूरी करके सीता अपने घर का गुजारा करती थी। एक दिन सीता के पति बीमार पड़ गए। लेकिन सीता के पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उसने सोचा कि मैं अपने पति के इलाज के लिए गधा बेच दूंगी। ये सोचकर सीता गधा लेकर बाजार की ओर चल पड़े। 

बाजार का रास्ता जंगल होकर गुजरता था। रास्ते में सीता को एक साधू दिखाई दिए। सीता उनके पास गई और पूछी। साधु जी आप इस जंगल से कैसे ? साधु बोले बेटा मुझे पास के गांव जाना है पर मैं रास्ता भटक गया हूं और मुझे भूख भी लगी है। 

इस पर सीता बोली साधु जी मेरा गधा बेचने मैं जा रही हूं लेकिन मेरे पास खाने के लिए ये फल है आप इसे खा सकते हैं। ऐसा कहते ही सीता ने कुछ फल साधु को दे दिए। साधु ने वो फल खाए और सीता से बोले बेटा तो इस गधे को बेचकर क्या करना चाहती हो। सीता बोली मेरे पति की तबीयत खराब है। उनके इलाज के लिए मेरे पास पैसे नहीं है इसीलिए इस गधे को बेचने जा रही है जिससे मैं अपने पति का इलाज करवा सकें। 

इस पर साधु बोले बेटा तुम्हें ये घड़ा बेचने की कोई जरूरत नहीं। मैं तुम्हें एक जादुई घड़ी देता हूं। ऐसा कहते ही साधु ने कुछ मंत्र पढ़े और हाथ में घड़ी प्रकट हो गई। साधु वो घड़ी सीता को देते हैं और बोलते हैं लो बेटा इस घड़ी को अपने हाथ में पहन लो ये जादुई घड़ी है जब भी तुम्हे पैसे की जरूरत हो तो इसे अपनी उंगली से स्पर्श करनाऔर तुम्हारे सामने बो आजाएंगे। 

पर एक बात हमेशा ध्यान रखना तुम्हारे अलावा कोई और इस घड़ी का इस्तेमाल नहीं कर सकता है। अगर किया तो हमेशा के लिए वो बिस्तर पर ही रह जाएगा। ये सुनते ही सीता साधु को धन्यवाद कहकर वहां से चली गई। 

सीता अपने घड़े के साथ गांव वापस लौट गई।

आप पद रहे हैं (Jadui Kahani)

उसे देखकर उसका पति पूछा तुम तो गधा बेचने बाजार गई थी तो इतने जल्दी वापस कैसे आ गए? सीता इस पर कही, अब हमें अपना गधा बेचने की कोई जरूरत नहीं है। जंगल में मुझे एक साधु मिले थे। उन्होंने मुझे एक जादुई घड़ी दी है। ऐसा कहते ही सीता उस घड़ी को उंगली से दबाती है और उनके सामने कुछ सिक्के आ जाते हैं।

ये देखकर सीता का पति बहुत खुश हो जाता है। सीता ने उसका इलाज करवाया और खुशी खुशी में रहने लगे। जब भी पैसे की जरूरत होती थी वह घड़े को दबाकर पैसे ले लेते थे। इस तरह से उनकी गरीबी धीरे धीरे कम होने लगी और साथ ही सीता गांव के कुछ लोगों की भी मदद करने लगी।

सीता की ये बातें देख कुछ लोग जलने लगे। आखिर सीता के पास इतने पैसे आए कहां से? उसके पास तो पति का इलाज करने के लिए भी पैसे नहीं थे।

एक आदमी बोला हमें पता लगाना चाहिए। दूसरे आदमी ने कहा ऐसा ही एक दिन रमेश की नजर सीता के घर जाती है। वे अंदर देखता है तो सीता घडी दबाकर पैसे निकाल रही होती है। ये देखकर रमेश दंग रह जाता है और सोचता है अच्छा तो ये बात है। सीता के पास ये जादुई घडी है उसी की वजह से सीता और उसका परिवार इतना धनवान बन गया है। मुझे ये घडी चुराना ही होगा।

रमेश रात होते ही सीता के घर घुस जाता है। सीता और उसके पति सोते रहते हैं। वह घड़ी सीता के हाथ में ही होती है। रमेश चुपके से वो घड़ी निकाल कर लेके चला जाता है। 

और वहां अपने घर पहुँचने के बाद वो कहने लगता है। हां हां हां अब मैं भी अमीर बन जाऊंगा। ऐसा कहते ही रमेश ने उस घड़ी को हाथ में पहन लिया। लेकिन तब भी रमेश को जोर से झटका लगा और वो जमीन पर गिर गया।

लाख कोशिश करने के बावजूद भी वो उठ नहीं पाया। रमेश हमेशा के लिए बिस्तर पर लेटा रहता था।

जब ये बात सीता को समझती है वो रमेश के घर जाती है और उसे कहती है भैया ये घड़ी सिर्फ मेरे हाथ में ही काम करेगी अगर दूसरे ने इसका इस्तमाल किया तो यही हाल होगा। बेहतर है मेरे कपड़े तो मुझे वापस कर दो। ऐसा कहते ही रमेश ने वो घड़ी सीता को वापस कर दिया और माफी भी मांग ली। सीता वहां से चली जाती है। 

कहानी से सीख- Jadui Kahani Hindi

हमें किसी से जलना नहीं चाहिए और चोरी तो बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।

3. Jadui Kahani Hindi – जादुई छड़ी

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बहुत दिनों पुरानी बात है। एक बहुत सुंदर गांव था। इस गांव में रमेश नाम का एक गरीब उसकी मां उसके भाई सुरेश के साथ रहता था।

वो मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता था। वह पास के जंगल में जाकर सूखी लकड़ियां इकट्ठा करता और गांव में जाकर बेच देता।

उस जंगल में विशाल पेड़ था। लकड़ियां जमा करने के बाद रामू उस पेड़ के नीचे आराम से बैठ जाता था। कुछ देर आराम करके लकड़ियां बेच कर रमेश को जैसे ही पैसे मिलते थे वो लेकर घर चला जाता था। 

मां बहुत भूख लगी है आज जो भी होगा दे दो। चलो सुरेश खाना खाते हैं। रमेश बोला मां ने दोनों को बासी रोटियां परोसी।

सुरेश बोलता है क्या मां रोज वही बासी खाना। कुछ तो नया दिया करो। 

माँ कहता हैं सुरेश ऐसा नहीं बोलते बेटा जो भी प्यार से मिला उसे खाना चाहिए। रमेश बहुत मेहनत करके पैसे लाता है जिससे हम सब बासी रोटियां तो खा सकते हैं। रमेश को अपने परिवार का यह हाल देखा नहीं गया। वह उदास हो गया। 

हमेशा की तरह रमेश रोज जंगल में जाता। सूखी लकड़ियां जमा करता और उस पेड़ के नीचे बैठ जाता। लेकिन रमेश आज ज्यादा ही चिन्तित था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। तभी एक चमत्कार हुआ। उस विशाल पेड़ की आत्मा प्रकट हुई।

उस पेड़ ने रमेश से पूछा हे बेटा तुम चिंतित क्यों बैठे हो? क्या बात है?

तब रमेश ने कहा अरे तो तुम बोल भी सकते हो। जी हां बेटा। तब रमेश ने उस पेड़ को अपनी हालत बताई तो ये बात है पेड़ बोला।

तभी उस पेड़ ने चमत्कार करके जादुई छड़ी रमेश को दी । 

फिर रमेश ने कहा एक मामूली लकड़ी की छड़ी इसका मैं क्या करूंगा? पड़ने कहा ये मामूली छड़ी नहीं है। जादुई छड़ी है इस छड़ी की मदद से जो खाना चाहो मिल जाएगा। 

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शुक्रिया मेरे दोस्त। अब इसका मतलब मैं में मैं और मेरा परिवार कभी भूखा नहीं सोएंगे। लेकिन रमेश एक बात हमेशा याद रखना। इस छड़ी का इस्तेमाल दिन में सिर्फ एक बार हो सकता है। जरूर मेरे दोस्त रमेश बोला ऐसा बोलकर रमेश वहां से चला गया।

जादुई छड़ी लेकर रमेश खुशी खुशी अपने घर पहुंचा और अपने माँ को कहा मां मां देखो देखो मैं क्या लाया। 

क्या बेटा एक मामूली सी छड़ी?

 मां ने पूछा इस छड़ी से तुम क्या करोगे? सुरेश ने कहाअरे ये कोई मामूली छड़ी नहीं। ये जादुई छड़ी है इस छड़ी से हम चाहे जैसा चाहे जो भी खाना मंगवा सकते हैं। रमेश के भाई ने कहा सच में भैया अरे वाह तुम तो मंगवाते हैं मुझे भी बहुत भूख लगी है तो बोलो क्या चाहिए तुम्हें।

रमेश ने सुरेश से पूछा मुझे मुझे ताजी रोटी चावल, खीर, पनीर, जलेबी और आइसक्रीम, चाहिए। सुरेश ने मांगा ऐसा कहते ही रमेश ने छड़ी को गोल घुमाया। सच में जमीन पर जो मांगा वो आ गया। 

फिर उन सब ने उस दिन पेट भरकर खाना खाया।

रमेश फिर हर दिन जंगल में जाता। सूखी लकड़ियां जमा करता। पेड़ के नीचे बैठ जाता। एक दिन घर से रमेश की मां बाहर गई। सुरेश घर पर अकेला ही था। उसे जोर से भूख लगी थी। उसने वो जादुई छड़ी ली गोल घुमाया और खाना मिल गया। सुरेश ने उस खाने को बड़े चाव से खाया और सो गया।

इधर जंगल से रमेश भी घर जल्दी वापस आ गया। उसे भी जोरों से भूख लगी थी। वो भी छड़ी को ढूंढने लगा। छड़ी मिलने के बाद रमेश ने उस छड़ी को गोल घुमाया जो खाना चाहिए था वह मांग की पर खाना नहीं मिला। रमेश ने फिर छड़ी को घुमाया फिर भी खाना नहीं आया तब उसे पेड़ की कही बात याद आई कि छड़ी को दिन में सिर्फ एक बार घुमाना है और मां भी घर वापस लौटी।

उसने देखा कि रमेश रो रहा है और सुरेश आराम से सो रहा है। उसने सुरेश को नींद से उठाया और रमेश को पूछा बेटा क्या हुआ तुम क्यों रो रहे हैं? 

रमेश ने कहा मां मुझे जोरों की भूख लगी थी इसलिए मैं घर जल्दी आया। छड़ी को घुमाया पर मुझे खाना नहीं मिला। इस इस सुरेश ने छड़ी का पहले इस्तेमाल कर लिया। रमेश बड़े दुख से बोला तब मां को सारी बात समझाई।

माने सुरेश को समझाया बेटा सुरेश हमेशा दूसरों के बारे में सोचा करो खुद के बारे में सोचने वाला स्वार्थी कहलाता है। जो भी मिला बांटकर खाना चाहिए चाहे वो थोड़ा हो या ज्यादा। सुरेश को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने रमेश से माफी मांगी पर तब तक देर हो चुकी थी।

क्यूंकि रमेश और उसकी मां को सुरेश के स्वार्थ की वजह से भूखा रहना पड़ा। 

कहानी से सीख- Jadui Kahani Hindi

हमें कभी स्वार्थी नहीं होना चाहिए और खुद से पहले परिवार के बारे में सोचना चाहिए। 

4. Jadui Kahani Hindi – जादुई पेटी 

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बहुत दिनों पुरानी बात है। एक गांव में दो भाई रहते थे। एक बहुत अमीर था उसका नाम हरि था। उसके पास सब कुछ था। दूसरा भाई गरीब था उसका नाम भोला था। उसके पास खाने पीने के लाले थे और पहनने के लिए ठीक से कपड़े भी नहीं थे। उसका परिवार भूख से तड़पता था। 

भोला ने सोचा क्यों न भाई के पास जाकर कुछ मदद मांगी जाए। जब भाई हरि के पास भोला गया तो उसने मदद करने से इनकार कर दिया। भोला बहुत दुखी हुआ। 

एक दिन भोला काम की तलाश में भटक रहा था। रास्ते में उसे एक बूढ़ा आदमी दिखा। उसके पास तीन पीढ़ियां थीं। उससे वो पेटियां नहीं उठाई जा रही थी। भोला उसके पास गया। 

लगता है बहुत भारी है। क्या मैं आपकी कुछ मदद कर दूं? भोला ने पूछा, ठीक है बेटा इसे उठा लो और मेरे घर तक ले चलो। हां बाबा ऐसा कहते ही भोला उस आदमी के पीछे पीछे चल दिया और उस आदमी के घर तक पहुंचा। 

शुक्रिया बेटा लेकिन मुझे बताओ तुम इतना परेशान क्यूं हो?  क्या कोई तकलीफ है। बाबाजी मैं बहुत गरीब हूं। एक वक्त का खाना भी नहीं मेरे पास काम भी नहीं मिल रहा। फिर बाबा ने कहा तुम यहीं रुको बेटा मैं अभी आता हूं वो आदमी घर में जाता है और साथ में एक पेटी लाना।

ये लो बेटा ये पेटी तुम रख लो पर मैं इसको लेकर क्या करूंगा? बाबा ने कहा कि ये ऐसी वैसी पेटी नहीं है जादूई पेटी है। इसे खोलते ही तुम्हें जो चाहे मिल जाएगा। 

नहोला ने कहा जादूई पेटी! अरे वाह। लेकिन ये आप मुझे क्यों दे रहे? आदमी ने कहा बेटा अब मुझे इसकी जरूरत नहीं तुम्हें काम आएगी। तुम ले लो। अच्छा बाबूजी भोला बोला। 

फिर बाबूजी ने कहा और सुनो काम होने के बाद इसे बंद करना न भूलना नहीं तो अनर्थ हो जाएगा। शुक्रिया बाबूजी अब मैं चलता हूं। 

भोला वो पेटी खुशी खुशी घर लेकर जाता है और जाते ही पत्नी को कहता है ये देखो मुझे क्या मिला है। पत्नी बोली ये कौन सी पेटी ले आए हो हमें खाना चाहिए। इस पेटी का क्या करेंगे। 

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भोला ने कहा अरे भागवानी ये ऐसी वैसी पेटी नहीं है जादूई पेटी है। हमें जो भी चाहिए हमें दे देगी। सच में क्या अब हम कभी भूखे नहीं रहेंगे पत्नी बोली। फिर भोला ने कहा नहीं भागवान अब बातें ही करोगी ये इस पेटी का चमत्कार भी देखोगे। 

फिर भोला उस पेटी से कहता है जादूई पेटी। हमें ढेर सारा खाना दो। पेटी खुलती है उसमें से अलग अलग प्रकार के व्यंजन बाहर आते। भोला और उसकी पत्नी ने पेट भर के खाना खाया और पेटी को बंद कर दिया। शुरू से पेटी से रोज नई नई चीजें निकालना शुरू किया। कभी चावल तो कभी अनाज तो कभी दाल तो कभी बाजार का सामान। धीरे धीरे उसकी गरीबी दूर होने लगी। 

एक दिन भोला सामान लेकर बाजार जा रहा था। उसके भाई ने पूछा कहां जा रहे हो? फिर भोला कहा  यहीं बाजार में सामान बेचने। 

उसके भाई ने सोचा अरे कुछ दिन पहले इसके पास खाने के लिए नहीं था और आज सामान बेच रहा है। कुछ तो गड़बड़ है तभी तो मुझसे मदद मांगने आया था। आज इसका पीछा करता हूँ। 

भोला जब सारा सामान बेचकर घर जाता है उसका भाई उसके पीछे जाता है और खिड़की से झांकता है। भोला और उसकी पत्नी उस जादुई पेटी से अलग अलग सामान मंगवा रहे थे। उसका भाई ये सब देख लेता है। और वो सोचता हैं अच्छा तो ये बात है जादूई पेटी! ये तो बहुत अच्छी चीज है। वो जादुई पेटी मुझे चाहिए। वो भी आज। 

रात होते ही हरी चुपके से भोला के घर से वो पेटी चुराकर भाग जाता है। अब तो मैं भी अमीर बन जाऊँगा फिर हरी जंगल की ओर भागता हैऔर सोचता हैं इस पेटी को मैं घर में नहीं रख सकता। नहीं तो सब को पता चल जाएगा। 

दौड़ते दौड़ते वो थक जाता है और गड्ढे में गिर जाता है। प्यास लगने से वह जादुई पेटी से पानी मांगता है। पेटी से पानी आना शुरू होता है और वो कहने लगता हैं बस पास बस बस इतना ही इतना ही चाहिए और नहीं बस बस। 

हरी गड्डे में होने के कारण वह गड्ढा पानी से भर जाता है। हरी को तैरना भी नहीं आता इसलिए हरी उस पानी में डूब जाता है।  

कहानी से सीख- Jadui Kahani Hindi

किसी से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए जो है उसी में खुश रहो।

5. Jadui Kahani Hindi – जादुई कुआं

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सौ साल पहले की बात है। एक गांव में इच्छापूर्ति पेड़ था जो भी उस पेड़ को पानी डालकर अपनी इच्छा मानता वो उसकी इच्छा पूरी कर देता। एक आदमी उस पेड़ के पास आया और बोला हे इच्छापूर्ति पेड़ मुझे ढेर सारा धन चाहिए। ऐसा बोलते ही आदमी के सामने धन की थैली आ गई। वह आदमी पेड़ को धन्यवाद देकर वहां से चला गया। 

इसी तरह कई लोग उस पेड़ को पानी डाल के अपनी इच्छा मानने लगे और पेड़ उन सबकी इच्छा पूरी करता रहा। इससे गरीब लोगों को कुछ फायदा होने लगा। 

लेकिन कुछ सालों बाद इच्छापूर्ति पेड़ बूढ़ा हो गया उसकी शक्तियां भी खत्म हो गई। अब वो किसी की इच्छा पूरी करने के लायक नहीं रहा। 

एक दिन एक औरत उस पेड़ के पास आई और बोली हे इच्छापूर्ति पेड़। मुझे खाने के लिए कुछ अनाज चाहिए। लेकिन उस औरत की इच्छा पूरी नहीं हुई। वो औरत नाराज होकर वहां से चली गई। ये देखकर पेड़ को बड़ा दुख हुआ।

वो खुद से बोलने लगा काश कुछ ऐसा हो जाए कि कोई हुई सक्तिया मुझे वापस मिल जाए और मैं लोगों की इच्छा पूरी कर सकूं। मुझे ये बिल्कुल अच्छा नहीं लगता कि लोग खाली हाथ वापस जा रहे। हे भगवान मुझे मेरी सारी शक्तियां वापस लौटा दो आपकी बहुत कृपा होगी बहुत बहुत कृपा होगी। 

ऐसा बोलते ही इच्छापूर्ति पेड़ भावुक हो गया और रोने लगा। तभी वहां भगवान प्रकट हुए और पेड़ से बोले क्या हुआ पेड़ क्यों रो रहे हो? पेड़ ने अपने सारि परिसानिया बताया। भगवान मेरी सारी शक्तियां अब खत्म हो गई है। मैं किसी की मदद नहीं कर सकता। कृपया मेरी मदद करें।

इस पर भगवान बोले एक उपाय है थोड़ा कठिन है यहां से दूर जंगल में एक जादुई कुआं है। अगर उस कुएं से पानी लाकर तुम्हें डालें तो तुम्हारी शक्तियां वापस जा सकती हैं लेकिन वो पानी कौन लाएगा ये तुम्हें सोचना है। ऐसा बोलते ही भगवान गायब हो गए और पेड़ नाराज हो गया क्यूंकि वो तो चलकर कुएं के पास जाएगा नहीं सो वो रोने लगा।

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पेड़ की रोने की आवाज सुनकर वहां से गुजर रहा एक आदमी उसके पास आया। क्या हुआ इच्छापूर्ति पेड़? तुम क्यों रो रहे हो? जब पेड़ ने सारी हकीकत उसे बताई। आदमी समझदार था उसने पेड़ की मदद करने की ठानी।

मैं तुम्हारी मदद करूंगा मुझे बताओ क्या करना होगा?आदमी ने पूछा।

इस पर पेड़ ने बताया कि जंगल में दूर एक जादुई कुआं है वहां से पानी लाकर मुझे डालना है। फिर मेरी सारी शक्तियां वापस लौट आएंगी। ऐसा सुनते ही वो आदमी वहां से जंगल की ओर चला गया।

चलते चलते वो जादूई हुआ दिखाई दिया वो झट से कुएं के पास गया। और कुएं से पानी निकाला और एक बोतल में भर लिया। और खुशी खुशी उस पेड़ के पास आया। उस आदमी को देख पेड़ भी बहुत खुश हुआ। उस आदमी ने बोतल का पानी उस पेड़ में डाला और चमत्कार हुआ। पेड़ की सारी शक्तियां वापस आ गई।

पेड़ ने अपनी खुशी से उस आदमी को सोने के सिक्के से भरी पोटली दी और धन्यवाद कहा। वह आदमी वहां से चला गया। 

फिर दूसरे दिन वो औरत फिर से वहां आई। वो बहुत भूखी थी। उसे कुछ भी खाने को नहीं मिला था। पेड़ ने उसे पहचान लिया और अपनी शक्ति से उस औरत को चमत्कार करके दिखाया। उस औरत ने फिर पेट भर कर खाना खाया और पेड़ का शुक्रिया अदा किया।

पेड़ को भी उसकी मदद करके अच्छा लगा। अब वह बहुत खुश था। चूंकि वो सबकी मदद फिर से कर रहा था और सबकी इच्छाओं की पूर्ति कर रहा था। 

कहानी से सीख- Jadui Kahani Hindi

हम अगर सबका मदद कर्ज तो भगवन भी हमारा मदद किसी न किसी रूप में करेगा। 

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Dhruba Mandal
नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम हैं ध्रुब मंडल में ओड़िसा के एक छोटे से गाँव में से हूँ और इस ब्लॉग संस्थापक हूँ. में एक ग्रेजुएट स्टूडेंट हूँ. और मुझे टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, लाइफ स्टाइल के बारे में लिखना ज्यादा पसन्द आता हैं.
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