Kids Story In Hindi-गोलगप्पे वाला – Pani Puri Wala

Kids Story In Hindi-गोलगप्पे वाला

एक लम्बा  समय पहले एक गांव में आदित्या और भावना नामक पति पत्नी रहते थे । उनका चित्रा नामक एक सुन्दर सी बेटी थी वह एक छोटी सी घर में रहते थे । आदित्या एक बहुत नीक इन्सान था और जितना उसके पास था उतने में ही खुश रहने वाला था । वह पानी पूरी बेच के आए हुए पैसों से ही अपने परिवार की देखभाल करता था । हर रोज़ को सुबह पानी पूरी बनाकर बेचने जाता था । पानी पूरी,पानी पूरी स्वादिष्ट पानी पूरी एक बार खाना काफी नहीं  होता है । बार बार खाने का मन करता है । दस रूपए का एक प्लेट आइए आइए। ऐसी पुरी गांव में जाते हुए बेचता था । उसके बनाए हुए पानी पूरी स्वादिष्ट रहने पर सभी लोग बहा खाना पसंद करते । So You Read (Kids Story In Hindi-गोलगप्पे वाला)

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रोज की तरह बो एक दिन पानी पुरी बीच के अँधेरा होने पर वापस घर जाते रहता है । जब उसे रास्ते में कुछ लोग भागते हुए नजर आते हैं उसके पलक झपकते ही बो लोग गायब भी हो जाते हैं । फिर उसने  सोचा कौन थे वो लोग? क्यों भाग रहे थे? और इतने में ही कहां गायब हो गए । ऐसी वो अपने आप में सोच रहा था जब उसे रास्ते के बगल में एक सूटकेस दिखाई देता है । तो उसने सोचा यह किसका सूटकेस हैं, शायद किसी ने खो दिया होगा । सुबह में इसको जमींदार को दे देता हूं वो इसको उसके मालिक तक पहुंचा देंगे । ऐसी सोच के वो सूटकेस अपने साथ अपने घर ले जाता है । 

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आदित्य की पत्नी उस सूटकेस को देख पूछती है ये किसका सूटकेस है । आदित्य ने कहा मझे नहीं पता आते समय रास्ते में मिला था मुझे। फिर उसके पत्नी ने पूछा क्या हैं इस सूटकेस में? फिर आदित्य ने कहा नहीं मुझे नहीं पता मैंने देखा ही नहीं । उसके पत्नी ने कहा अच्छा तो रुकिए में पहले  ये देखती हूँ की इसमें है क्या । और ऐसे  सूटकेस खोलती है। सूटकेस  खोलके  देखने पर उन्होंने  देखा की  बो सूटकेस  हीरे मोती और सोने से भरा हुआ था । उसके पत्नी ने कहा  देखा आपने इसमें  कितने हीरे कितना सोना है इसमें।अब हमें कभी वापस मेहनत करने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी।

 आदित्य – भावना ये सूटकेस हमारा नहीं है  किसी ने खो दिया इससे कल सुबह इसे ज़मींदार के हवाले करने के लिए इसे लेके आया हूं । 

भावना-तो आप क्या सच में इसे जमींदार को लौटाएंगे?

आदित्य – हां। 

 भावना– मैं यह स्वीकार नहीं करूंगी । हम इस सूटकेस को हमारे ही पास रखेंगे आपको मेहनत करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी । हम आखिरकार बहुत खुश रहेंगे । 

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अपनी पत्नी का उस बात ना स्वीकार करने पर आदित्य उसे दुख न पहुंचाने के लिए उसे कुछ नहीं कहता और सोच में पड़ जाता है । अगर मैं उन हीरे और मोती को लेता हूं तो गलत है पर अगर मेरी पत्नी वो सब लेती है तो मेरी गलती नहीं है न । ऐसी सोच कर अपनी पत्नी से कहता हैं। किसी और का कमाया हुआ मुझे खर्च करना ठीक नहीं लगता हैं मैं अपने पानीपुरी का दुकान ही चलाऊंगा । तुम्हें जो पसंद तुम वही करो । ऐसे कहने पर उसकी बीवी खुश होती है । 

कुछ दिन बाद उसकी पत्नी मिले हीरे मोती और सोना बेचके  बड़ा सा घर खरीद लिया। और वे सब उसी घर में चले जाते हैं हैं । मगर आदित्य अपना पानीपुरी का व्यापार नहीं छोड़ता है । एक दिन जमींदार के पास एक औरत आती है  और कहती हैं प्रभु,प्रभु मेरे घर में किसी ने सारे हीरे, सोना मेरे गहने चुरा लिया है । मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं इसीलिए आपके पास भागके आई हूँ  कृपया मेरी मदद कीजिए प्रभु। 

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जमींदार-फिकर न करो माता, मेरे पर भरोसा करके आप चले जाओ मैं उस चोर को पकड़ कर आपको बुलाएगा । जमींदार के ऐसे कहने पर वह उन पर भरोसा करके वहां से चली जाती है । उसके बाद कुछ ही दिन में जब आदित्या और उसका परिवार एक बड़ा घर खरीद कर उसमें रहने लग जाते हैं तो गांव के लोग में उन्हीं के बारे में खुसर फुसर शुरू हो जाती है । ऐसे ये बात जमींदार तक पहुंचती है । एक साधारण पानीपुरी बेचने वाला एकदम से इतना बड़ा घर कैसे खरीद पाया । फिर एक ने कहा पता नहीं प्रभु किसी को नहीं पता । गांव के सारे लोग भी आश्चर्य चकित हो के इसी के बारे में बात कर रहे हैं । ऐसे ही मैं उनके आपको बताया। 

जमींदार -ठीक है उन दोनों को इधर ले आओ। जमींदार का  कहने पर सेवक उन दोनों को उनके पास ले जाती है । आदित्या मुझे तुम्हारे बारे में सब पता है । तुम्हारे व्यापार के बारे में भी पता है । तुम्हे  कुछ पूछने के लिए यहां बुलाया हूँ। 

आदित्य– तो पूछिये प्रभु?

जमींदार-कुछ नहीं । तुम इतने कम दिनों में उतना बड़ा घर कैसे खरीद पाए हो सच बताओ। 

तो भाबना सोचता हैं, तो यह पूछने के लिए जमींदार हमें यहापर बुलाए  हैं । कुछ करना होगा वरना मेरे पति सब सच बता देंगे । फिर भाबना ने कहा मेरे पति का कमाया हुआ पैसा हम बचा बचाकर ये घर खरीद पाए है प्रभु । ऐसे हिम्मत से बोलती है ताकि किसी को शक ना आए । 

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जमींदार-माता आप पर कोई इल्जाम लगाने के लिए मैं आप लोगों को यहां नहीं बुलाया हूं । मेरे पास एक औरत की बोली है कि उसके गहने और सोना किसी ने चोरी कर लिया और उसी समय में आपने एक बड़ा घर लिया । हालत  मुझे आपसे यह सब पूछने पर मजबूर कर रहे हैं तो सच कहिए कि आपको इतने पैसे अचानक कहां से मिले । फिर आदित्य सोचता हैं अगर मैं अब भी चुप बैठूंगा तो वो एक बहुत बड़ी गलती होगी। और उस औरत के दुख का कारण मैं ही हो जाऊंगा । ऐसी सोच कर आदित्या जमींदार को सच बताने का फैसला करता है । 

आदित्य-मुझे क्षमा करें प्रभु। और ऐसे जो कुछ भी हुआ वह प्रभु को बताता है और तुरंत गहनों वाला सूटकेस उनके हवाले कर देता । 

जमींदार-तुम्हें अपनी गलती का एहसास हुआ है और तुमने सच बताकर और गहने लाकर वापस कर दिए । इसीलिए मैं अपनी पहली गलती के लिए माफ कर दूंगा और दंडित नहीं करूंगा । लेकिन याद रखना आदित्या गलती न करना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है गलती करने वालों को रोकना। ये कभी मत दोहराओ। जमींदार  के माफ करने पर आदित्य उनके कृतज्ञ होता है और वहां से चला जाता है और जमींदार उन गहनों को उस औरत के हवाले कर देता है । हमेशा की तरह अपने पानीपुरी का व्यापार करता है और उसी से घर को चलाता है। 

शिक्षा:

तो इस कहानी का नैतिक हैं  कभी गलती नहीं करना और गलती करने वालों को प्रोत्साहित भी नहीं करना चाहिए ।

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admin
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3 Comments

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